सोमवार, 7 सितंबर 2020

प्रेम कहानी (1975)

निर्देशन: राज खोसला
निर्माताः लेखराज खोसला, भोलू खोलसा
कहानीः राज खोसला
अभिनय: राजेश खन्ना, मुमताज, शशी कपूर, विनोद खन्ना, लीला मिश्रा, यूनुस परवेज, के. एन. सिंह, त्रिलोक कपूर 
गायन: लता मंगेश्कर, मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार
गीत: आनन्द बक्शी
संगीत: लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
श्रेणीः रोमांस, गीत-संगीत

प्रेम कहानी एक प्रेम कहानी जैसी अधिकतर प्रेम कहानी होती है। मतलब पास-पड़ोस में रहने वाले दो लड़का-लड़की आपस में प्रेम करते है। पर किसी कारणवश उनकी शादी नहीं हो पाती और लड़की की शादी किसी तीसरे से हो जाती है। परन्तु इस प्रेम कहानी में एक मोड़ आता है -- लड़का वापस लड़की की जिन्दगी में आ जाता है। अब लड़की किसे चुनेगी - अपने पति को या अपने प्रेम को? मुमताज ने इस दुविधा को बड़ी सरलता से और बेबाक तरीके से प्रस्तुत किया है।


प्रेम कहानी


जैसा कि हर प्रेम कहानी में होता है। इस प्रेम कहानी में भी एक लड़का होता है। एक लड़की होती है। कभी दोनों हँसते है। 
 

कभी दोनों रोते है।


यहाँ तक कि एक शादी में दोनों लगभग शादी कर ही लेते है।


परन्तु मुमताज के पिता राजेश से उसकी शादी के खिलाफ है। इस पर मुमताज कहती है कि अगर आप राजेश के साथ मेरी शादी करके मुझे बिदा नहीं करेंगे तो मैं खुद चली जाऊँगी।


यह सुनकर मिस्टर सिंहा मिसेज सिंहा से कहते है -- अगर राजेश से शादी करनी है तो अपना पैगाम खुद लेकर जाए।

मुमताज राजेश के पास जाती है लेकिन राजेश शादी करने से इनकार कर देता है। 


राजेश -- शादी के बाद तो हर चीज फीकी पड़ जाती है। मैं एक शायर हूँ और मैं अपनी शायरी के गले में तुम्हारे पाँव की फाँसी नहीं डाल सकता। याद है उस रात मैंने कहा था, शादी इश्क का सारा रोमांस ही चौपट कर देती है।
मुमताज  -- उस रात तुमने ये भी तो कहा था, मेरे हाथ-पाँव में मेंहदी लगवाओगे।
राजेश -- कहा था। पर तुम भूल रही हो वो सब आशिकी की बातें थी -- शादी की नहीं।
मुमताज -- बहुत अच्छे! तुम समझते हो अगर तुम मुझसे शादी नहीं करोगे तो क्या मैं जिंदगी भर क्वाँरी रह जाऊँगी। मेरी शादी होगी और किसी शरीफ आदमी से होगी। और तुम सारी जिंदगी पश्चताते रहोगे।


मुमताज -- हैरान हूँ, तुम्हें इतने बरसों में पहचान न सकी। मगर फिर भी तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया। अच्छे वक्त पर बता दिया कि तुम कितने गिरे हुए आदमी हो।


मिसेज सिंहा -- राजेश से झगड़ा हो गया है क्या?
मुमताज -- झगड़ा नहीं छुटकारा हो गया है। मैं किसी शायर के गले की फाँसी नहीं बनना चाहती। डैडी से कह दीजिए, जहाँ मेरी शादी करवाना चाहते है करवा सकते है।
मिसेज सिंहा -- डैडी ने जो लड़का पसन्द किया है, कहो तो तस्वीर दिखा दूँ।
मुमताज  -- मैंने जीता-जागता इनसान पसन्द किया था। जब उसे न पहचान सकी तो अब तस्वीर देखकर क्या करूँगी।

मुमताज की शादी हो जाती है।


और पहली रात को ही घायल राजेश भी वहाँ आ पहुँचता है। वह शशी का दोस्त है।  अब दोनों पति-पत्नी राजेश के देखभाल में लग जाते है।


मुमताज अपनी इस अजीब हालत का ब्यान इस प्रकार करती है --


शर्म आती है मुझको सहेली
नया घर है मैं दुल्हन नवेली
बात मन की जो है एक पहेली
रहने दो इसे तुम पहेली
क्या मेरी प्रेम कहानी
नदिया से बिछड़ा पानी...

छूट जाती है बाबुल की गालिया
दूर संजोग ले जाते है
फूल बनती है जब खिलके कालिया
तोड़ के लोग ले जाते है
एक राजा ले आया बनके मुझे रानी
नदिया से बिछड़ा पानी...

एक दिन शशी को पता चल जाता है कि राजेश और मुमताज एक-दूसरे के पड़ोसी है और पहले से ही एक दूसरे को जानते है। 
 
वह राजेश से पूछता है -- क्या हुआ उस लड़की का, जिसे तूने धोखा दिया।
राजेश -- उनकी गली से कम तो नहीं है वतन की राह। मरने की बात आई तो हम उस तरफ चले गए।
शशी -- मगर वतन से वफादारी की ये शर्त कब निकल आई कि आदमी अपने प्यार से गद्दारी करे। क्या कभी उस लड़की ने ये कहा कि आजादी की लड़ाई में हिस्सा न ले।
मुमताज -- उस लड़की का क्या हुआ राजेश साहब? 
राजेश -- उसकी शादी हो गई।
मुमताज -- क्या वो अपनी शादी से खुश है?
राजेश -- पता नहीं।
शशी -- उसके खुश होने का सवाल ही पैदा नहीं होता, साहब। हिन्दुस्तानी लड़की जब प्यार करती है तब उसे जिन्दगी भर निभाती है।
मुमताज -- नहीं, जब हिन्दुस्तानी लड़की शादी करती है तब उसे जिन्दगी भर निभाती है। राजेश साहब, आपको उस लड़की से सच बोलना चाहिए था। मुमकिन है किसी की बीवी बनकर जीने के बजाये, आपकी बेवा बनकर जीना वो ज्यादा पसन्द करती।

रेडियो पर नूरजहाँ का गाया हुआ एक पुराना गाना बज रहा है --


कुछ भी न कहा, और कह भी गए।
कुछ कहते कहते रह भी गए।

बातें जो जबाँ तक आ न सकी
आँखो ने कही, आँखो ने सुनी
कुछ होटों पर, कुछ आँखों में
अनकहे फसाने रह भी गए
कुछ भी न कहा, और कह भी गए।

शशी को अभी तक नहीं पता है कि मुमताज ही राजेश की प्रेमिका है। बारिश का मौसम है। वह राजेश का मन बहलाने के लिए उसे मुमताज के साथ जबरदस्ती बाहर भेज देता है।


और अंत में शशी को मुमताज और राजेश की प्रेम कहानी का पता चल जाता है।  बात-बात में पिस्तौल निकल आती है और मुमताज अपने पति को बचाने के लिए राजेश को गोली मार देती है।


शशी का वहम दूर करने का बस यही एक तरीका था?


और इस प्रकार प्रेम पर कर्तव्य की विजय के साथ ही प्रेम कहानी का अन्त होता है। एक बार भी प्रेम हार गया।







कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें