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रविवार, 6 सितंबर 2020

दो रास्ते (1969)

निर्देशन: राज खोसला
निर्माताः लेखराज खोसला
कहानीः चन्द्रकान्त ककोड़कर
अभिनय: बलराज साहनी, कामिनी कौशल, राजेश खन्ना, मुमताज, प्रेम चोपड़ा, बिन्दु, वीना, असित सेन, लीला मिश्रा, जयन्त, मोहन चोटी, महमूद जूनियर, 
गायन: लता मंगेश्कर, मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार
गीत: आनन्द बक्शी
संगीत: लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
श्रेणीः पारिवारिक, रोमांस, गीत-संगीत

दो रास्ते राजेश खन्ना और मुमताज की पहली सुपर हिट  फिल्म है। इसके बाद राजेश खन्ना और मुमताज ने एक के एक सुपर हिट फिल्मे की।

यह फिल्म तीन भाइयों की कहानी है। सबसे बड़ा भाई बलराज के पिता ने मरते समय बलराज के पास एक सौतेली माँ, दो सौतेले भाई और एक सौतेली बहन और मकान छोड़ा था। बलराज ने अपने सौतले भाइयों को कर्ज के लेकर पढ़ाया। लेकिन प्रेम शादी के बाद अलग हो जाता है और पढ़ाई के लिया हुआ कर्ज चुकाने से मना कर देता है। कर्ज न चुका पाने के कारण पुश्तैनी मकान नीलाम हो जाता है।   


गीतों भरी कहानी


इस फिल्म में मुमताज और राजेश खन्ना पर फिल्माए गए सभी गीत बहुत लोकप्रिय है और फिल्म के मुख्य आकर्षण है। फिल्म की कहानी गीतों के सहारे आगे बढ़ती है। फिल्म का आरम्भ राजेश और मुमताज की नोंकझोक से होती है और पहला गाना कॉलेज पिकनिक में जहाँ राजेश खन्ना ने अपने दोस्तों के साथ मुमताज को पटाने की शर्त लगाई है...

ये रेश्मी जुल्फे


लेकिन जल्दी ही यह शरारत प्यार में बदल जाती है और ...

छुप गए सारे नजारे


और फिर मुमराज की बारी आती है राजेश को सताने की...

बिन्दिया चमकेगी



अंत में 

मेरे नसीब में ऐ दोस्त


मुमताज ने कई एक्शन फिल्मों में काम किया है लेकिन इस फिल्म में मुमराज ने रोमांस के सिवा कुछ नहीं किया है। जब उसकी माँ अपनी बड़ी बेटी बिन्दु के घर में आग लगाने की योजना बना रही है, तब मुमराज अपने पिता के साथ शतरंज खेल रही है।


और जब राजेश अपने भाई प्रेम और भाभी बिन्दु से लड़कर हस्पताल में बेहोश पड़ा है, तब भी मुमराज ने कुछ नहीं बोलती।


फिल्म में क्या बोलना है और क्या करना है, यह सब निर्देशक के हाथ में ही है। इसलिए इसके लिए मुमराज को  दोष देना उचित नहीं है। 


सोमवार, 3 अगस्त 2020

सोने की चिड़िया (1958)

निर्देशन: शाहिद लतीफ
कहानी: इसमत चुगताई
अभिनय: नूतन, बलराज साहनी, तलत महमूद, धूमल
गायन: आशा भोसले, मोहम्मद रफी, तलत महमूद
गीत: साहिर लुधियानवी, कैफी आजमी
संगीत: ओ पी नय्यर


मुमताज ने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। इस फिल्म में मुमताज अन्य बच्चों के साथ एक गाने में दिखाई पड़ती है।

गीतः छुक छुक रेल चली



गाने के अन्त में मुमताज जब नूतन की ओर देखती है तब वे क्या सोच रही होगी...

आप पूरी फिल्म यूट्यूब पर देख सकते है।



सोने की चिड़िया के अलावा मुमताज तलाक (1958) और जमीन के तारे (1960) में एक-एक गाने में काम किया है। क्या आपने उसे देखा...

फिल्म:  तलाक (1958) 

निर्देशन: महेश कौल
अभिनय: राजेन्द्र कुमार, कामिनी कदम, 
गायन: आशा भोसले
संगीत: सी. रामचन्द्र

इस फिल्म में भी मुमताज एक गाने में अन्य बच्चों के साथ बैठी हुई है।



फिल्म: जमीन के तारे (1960)


निर्देशन: चन्दुलाल शाह
अभिनय: डेजी ईरानी, हनी ईरानी, मोतीलाल, आगा, अचला सचदेव, टुनटुन
गायनः मोहम्मद रफी, आशा भोसले, सुधा मल्होत्रा
संगीतः एस. मोहिन्दर

इस फिल्म के क्रेडिट्स में मुमताज का नाम है, लेकिन क्या आप ने इस फिल्म में मुमताज को देखा। 

पूरी फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है।